Friday, 9 September 2011

दो हाइकु गीत


डॉ सुधा गुप्ता
1-जादू की छड़ी

जादू की छड़ी
भला कहाँ से पाई
बोल चितेरे !
हज़ारों रंग
यूँ सिलसिलेवार
कैसे बिखेरे ?
धरा बुलाती
चित्रपटी-सी सजी
बड़े सवेरे
      बतासा खा के
कचनार शाख़ से
सारिका टेरे
अमराई में
कुहू-कुहू के बोल
शहद सने रे !
      घुमाई तूने
      कौन-सी जादू छड़ी
बता चितेरे !
-0-
2-ताल मखाना

आएगा फिर
हरा, सुगन्ध भरा
ताल मखाना ।
      श्वेत गुलाबी
खिले कमल-दल
पोखर फूला

भीनी खुशबू
सुरंग मधुरिमा
भँवरा भूला
हरित नाल
में लतक झूलता
ताल मखाना ।
      कुछ दिन को
परिश्रमी बालक
रोज़ी पाएँगे

तैर-कूद वे
पोखर में घुसके
कुछ लाएँगे
हरी डिबिया
छिपा पड़ा है मीठा
ताल मखाना ।
      कभी सिंघाड़े
      कमल-फूल कभी
वे पा जाएँगे

दो-चार पैसे
बदले में मिलेंगे
कुछ खाएँगे
बेचेगा फिर
सजा टोकरी , बच्चा
ताल मखाना
-0-

No comments:

Post a Comment