डॉ सुधा गुप्ता
1-जादू की छड़ी
जादू की छड़ी
भला कहाँ से पाई
बोल चितेरे !
हज़ारों रंग
यूँ सिलसिलेवार
कैसे बिखेरे ?
धरा बुलाती
चित्रपटी-सी सजी
बड़े सवेरे
बतासा खा के
कचनार शाख़ से
सारिका टेरे
अमराई में
कुहू-कुहू के बोल
शहद सने रे !
घुमाई तूने
कौन-सी जादू छड़ी
बता चितेरे !
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2-ताल मखाना
आएगा फिर
हरा, सुगन्ध भरा
ताल मखाना ।
श्वेत गुलाबी
खिले कमल-दल
पोखर फूला
भीनी खुशबू
सुरंग मधुरिमा
भँवरा भूला
हरित नाल
में लतक झूलता
ताल मखाना ।
कुछ दिन को
परिश्रमी बालक
रोज़ी पाएँगे
तैर-कूद वे
पोखर में घुसके
कुछ लाएँगे
हरी डिबिया
छिपा पड़ा है मीठा
ताल मखाना ।
कभी सिंघाड़े
कमल-फूल कभी
वे पा जाएँगे
दो-चार पैसे
बदले में मिलेंगे
कुछ खाएँगे
बेचेगा फिर
सजा टोकरी , बच्चा
ताल मखाना
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