Friday, 9 September 2011

21 हाइकु


 1
बर्फ़ के फाहे
आहिस्ता गिर रहे
धुनी रुई -से
2
मेघ मुट्ठी में
कैद चाँद फिसला
निकल भागा !
3
बज उठते
सन्नाटे के घुँघरू
पाखी के स्वर !
4
खुशी अकेले
बाँटी सबके साथ
दोबाला हुई !
[ दोबाला = दुगुनी ]
5
नीला कालीन
चर गए शशक
दूब के धोखे !
6
हिरना आँखें
तीर-सी बिध गई
भोले मन में !
7
चिड़िया रानी
चार कनी बाजरा
दो घूँट पानी !
8
कूकी जो पिकी
' छ्न्न' दोपहरिया
काँच-सी टूटी !
9
कौन पानी पी
बोलती री चिड़या
इतना मीठा
10
पौष की रात
नीम की शाख से झाँकी
चाँद की फाँक !
11
यादों के छौने
मन की डगर से
छलाँग गए
12
नींद में पेड़
मुस्कुराया कली का
सपना आया
13
पलक पाँव
सपनों की झालर
उलझ गई
१४
धूप जल में
आँखे मूँद नहाते
ठिठुरे पंछी !
15-
खिड़की पर
काँप रही गौरैया
पानी से तर
16-
पत्तियाँ ओढ़े
बैठी रही चिड़िया
रात, पानी में
17-
हवा उड़ाती
बादलों की पतंग
डोर न माँझा
18-
आई बरखा
आँचल की हवा दे
गले लगाया
19-
बाराती मेघ
आकाश-मण्डप में
इतरा बैठे
20-
टूटा घोंसला
बेघर हुई मैना
सहमी बैठी
21-
मचल रहा
नन्हा-मुना सूरज
स्कूल न जाऊँ
-0-

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